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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर पंधाना मंडल में आयोजित हुआ श्रद्धांजलि कार्यक्रम,

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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर पंधाना मंडल में आयोजित हुआ श्रद्धांजलि कार्यक्रम,

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कश्मीर से धारा 370 हटाकर डा. मुखर्जी का संकल्प पूर्ण किया, ,,विधायक छाया मोरै,,

खंडवा। भारतीय जनसंघ के संस्थापक, महान शिक्षाविद एवं प्रखर राष्ट्रवादी विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर मंगलवार को पंधाना मंडल में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि बलिदान दिवस के कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए दिए गए उनके बलिदान को नमन किया गया।
इस अवसर पर पंधाना की लोकप्रिय विधायक श्रीमती छाया गोविंद मोरे ने उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए अपना संपूर्ण जीवन देश की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे” के संकल्प के लिए डॉ. मुखर्जी ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जो देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा। उनके विचार और आदर्श भारतीय जनता पार्टी की वैचारिक नींव हैं तथा उनके बताए मार्ग पर चलकर ही राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। विधायक छाया मोरै ने कहा डॉक्टर मुखर्जी का संकल्प था कि कश्मीर से धारा 370 हटना चाहिए जिसे हमारे देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूर किया, आज पूरी तरह कश्मीर स्वतंत्र हे। प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई तथा उनके राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को स्मरण किया गया।
इस अवसर पर विधायक छाया मोरै के साथ पंधाना मंडल अध्यक्ष फकीरचंद कुशवाह, नगर परिषद पंधाना के सभापति जगदीश एकले, अमजद कादरी, धर्मेंद्र राठौर, राजेश राठौर, शैलेश राठौर सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने डॉ. मुखर्जी के आदर्शों को आत्मसात करते हुए राष्ट्रसेवा और संगठन को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रभक्ति, त्याग और समर्पण का प्रतीक है तथा उनके विचार आने वाली पीढ़ियों को देशहित में कार्य करने के लिए सदैव प्रेरित करते रहेंगे।

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